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यह सच है कि भारतीय राजनीति के इतिहास में साल 2013-2014 एक बड़ा टर्निंग पॉइंट था, और उस समय राजनाथ सिंह जी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
राजनीति के समीकरण: राजनाथ सिंह का वह त्याग और योगी आदित्यनाथ की बढ़ती लोकप्रियता
नई दिल्ली/और लखनऊ, 2026: भारतीय जनता पार्टी के भीतर सत्ता और संगठन के बदलते स्वरूप को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। आज जब देश में योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री के तौर पर देखने की मांग जोर पकड़ रही है, तो इतिहास के पन्ने राजनाथ सिंह जी के उस बड़े फैसले की याद दिलाते हैं जिसने नरेंद्र मोदी के विजय अभियान की नींव रखी थी।
2013-14: जब राजनाथ सिंह ने बदली भाजपा की दिशा
साल 2013 में जब भाजपा के भीतर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर मंथन चल रहा था, तब तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने एक साहसिक फैसला लिया था। वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेदों के बावजूद, राजनाथ सिंह ने ही नरेंद्र मोदी के नाम पर मुहर लगवाई और सभी कार्यकर्ताओं व नेताओं से उन्हें पीएम उम्मीदवार मानने का अनुरोध किया।
बड़ा त्याग: उस समय राजनाथ सिंह स्वयं भी पीएम पद की दौड़ में सबसे आगे हो सकते थे, लेकिन उन्होंने संगठन के हित में अपना कदम पीछे खींचा।
अनुशासन की मिसाल: उन्होंने पूरे देश का दौरा कर यह संदेश दिया कि नरेंद्र मोदी ही देश का भविष्य हैं।
मंत्रिमंडल में बदलाव और कद की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा अक्सर होती है कि जिस राजनाथ सिंह ने मोदी को केंद्र में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई, समय के साथ सरकार में उनकी स्थिति बदली। 2014 में वे गृह मंत्री (नंबर 2) थे, लेकिन 2019 और उसके बाद उन्हें रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। हालांकि रक्षा मंत्री का पद बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन विश्लेषकों का एक वर्ग इसे संगठन में उनके ‘सीनियर’ प्रभाव को कम करने के प्रयास के रूप में देखता है।
योगी आदित्यनाथ: जनता की नई पसंद?
वर्तमान परिदृश्य में, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता केवल यूपी तक सीमित नहीं रही है। जनता के बीच “बुलडोजर मॉडल” और सख्त कानून-व्यवस्था की छवि ने उन्हें भविष्य के सबसे सशक्त पीएम उम्मीदवार के रूप में स्थापित कर दिया है।
अपार जनसमर्थन: सोशल मीडिया से लेकर चुनावी रैलियों तक, ‘मोदी के बाद योगी’ (After Modi, Yogi) के नारे अब आम हो चुके हैं।
साल 2013 में जब भाजपा के अंदर नेतृत्व को लेकर मंथन चल रहा था, तब तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने एक साहसिक निर्णय लिया। वरिष्ठ नेताओं की असहमति के बावजूद उन्होंने नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को भांपते हुए उन्हें चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष और फिर प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। आज राजनाथ सिंह को उस फैसले के लिए पार्टी का सबसे भरोसेमंद स्तंभ माना जाता है।”
