भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव के लिए अपनी बहुप्रतीक्षित उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में पार्टी ने अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह देते हुए आगरा के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक और वर्तमान प्रदेश महामंत्री रामप्रताप सिंह चौहान को राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित किया है।
संगठन में साढ़े तीन दशकों से भी अधिक का लंबा अनुभव रखने वाले रामप्रताप सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाए जाने से आगरा और ब्रज क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बीजेपी ने उनके संगठनात्मक अनुभव और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जातीय व क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए यह बड़ा दांव खेला है।
1991 से हुई थी सफर की शुरुआत, संभालीं कई बड़ी जिम्मेदारियां
1969 में आगरा में जन्मे और पेशे से वकील रामप्रताप सिंह चौहान का राजनीतिक सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उन्होंने चुनावी पोस्टर या मंच की राजनीति के बजाय संगठन के नेटवर्क को अपनी असली ताकत बनाया। उनके सफर के मुख्य पड़ाव इस प्रकार हैं:
भाजयुमो से शुरुआत (1991-1994): रामप्रताप चौहान ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत साल 1991 में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के मंडल अध्यक्ष के रूप में की थी।
महानगर से ब्रज प्रांत का सफर (1994-2005): वे 1994 से 1998 तक महानगर उपाध्यक्ष और फिर 2001 तक भाजयुमो के महानगर अध्यक्ष रहे। लगातार सक्रियता के बाद, साल 2001 से 2005 तक उन्हें ब्रज क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया।
ब्रज क्षेत्र में महामंत्री (2007-2012): संगठन में उनके काम को देखते हुए उन्हें साल 2007 से 2012 तक ब्रज क्षेत्र के प्रदेश महामंत्री का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया।
प्रदेश मंत्री की जिम्मेदारी (2013-2016): वह साल 2013 से 2016 तक उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश मंत्री पद पर कार्यरत रहे।
2017 में बने एत्मादपुर से पहली बार विधायक
संगठन में लंबे समय तक पसीना बहाने के बाद, साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें आगरा की एत्मादपुर विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में उन्होंने प्रचंड जीत दर्ज की और पहली बार विधानसभा की दहलीज पर कदम रखा। हालांकि, साल 2022 के चुनाव में उन्हें पार्टी से टिकट नहीं मिला, लेकिन उन्होंने बिना किसी नाराजगी के एक निष्ठावान कार्यकर्ता की तरह संगठन के लिए काम करना जारी रखा।
2023 से प्रदेश संगठन में बढ़ा कद, बने पश्चिमी यूपी के प्रभारी
टिकट न मिलने के बावजूद उनकी वफादारी और जमीनी पकड़ का इनाम पार्टी ने उन्हें जल्द ही दिया:
साल 2023 में उन्हें भाजपा का प्रदेश महामंत्री नियुक्त किया गया।
जून 2026 में भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी में उनके कद को बरकरार रखते हुए दोबारा प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई।
अगस्त 2026 में संगठन ने उन पर एक और बड़ा भरोसा जताते हुए उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्रीय प्रभारी नियुक्त किया।
- बीजेपी ने क्यों खेला रामप्रताप सिंह पर दांव?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में रामप्रताप सिंह चौहान ठाकुर (राजपूत) समुदाय से आते हैं। आगरा, अलीगढ़ और पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में ठाकुर समाज के बीच उनकी गहरी पैठ है। ऐसे समय में जब पश्चिमी यूपी में राजनीतिक और सामाजिक समीकरण काफी संवेदनशील माने जा रहे हैं, रामप्रताप सिंह चौहान को राज्यसभा भेजना संगठन के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
यूपी राज्यसभा चुनाव का पूरा गणित
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है। भाजपा गठबंधन के पास अपने 8 उम्मीदवारों को आसानी से जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है, जिससे रामप्रताप सिंह चौहान का दिल्ली (उच्च सदन) पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है।
