नई दिल्ली।
UGC के नए Equity Regulations को लेकर जारी विवाद के बीच भाजपा सांसद करण भूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि संसद की जिस स्टैंडिंग कमेटी के वे सदस्य हैं, उस कमेटी का इन नियमों के निर्माण में कोई भी योगदान नहीं रहा।
करण भूषण सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह भी आरोप लगाया कि कुछ समाचार चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मीडिया के एक धड़े द्वारा उनके खिलाफ भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि बिना उनका पक्ष जाने ऐसा किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया—UGC के नए नियमों पर भाजपा सांसद करण भूषण सिंह का बड़ा बयान: सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रखा पक्ष, बोले– स्टैंडिंग कमेटी का कोई योगदान नहीं

“मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि संसद की जिस स्टैंडिंग कमेटी का मैं सदस्य हूं, उस कमेटी का इन नियमों के निर्माण में कोई भी योगदान नहीं था।”
UGC से पुनर्विचार और जनभावना के सम्मान की मांग
भाजपा सांसद ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी कहा कि उनकी भावनाएं समाज के लोगों के साथ हैं और UGC को जनभावना का सम्मान करना चाहिए।
“मेरी मांग है कि UGC अपने इस नियम पर पुनः विचार करे और इसमें आवश्यक सुधार लाए, जिससे समाज में जाति आधारित किसी भी प्रकार की वैमनुष्यता न फैल सके।”
“शिक्षण संस्थान जातिगत युद्ध का केंद्र नहीं बन सकते”
करण भूषण सिंह ने दो टूक कहा कि देश के शिक्षण संस्थानों को जातिगत टकराव का केंद्र नहीं बनने दिया जा सकता।
“हम अपने शिक्षण संस्थाओं को जातिगत युद्ध का केंद्र बनने नहीं दे सकते हैं। हम सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं।”
विवाद के बीच आया बयान
गौरतलब है कि UGC के नए नियमों को लेकर पहले से ही देशभर में बहस चल रही है। जहां कुछ वर्ग इसे सामाजिक न्याय की दिशा में अहम कदम बता रहे हैं, वहीं कई छात्र संगठनों और सामाजिक वर्गों ने इन नियमों पर आपत्ति जताई है।
ऐसे में भाजपा सांसद करण भूषण सिंह का सोशल मीडिया पोस्ट UGC विवाद में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
अब आगे क्या?
करण भूषण सिंह के बयान के बाद
स्टैंडिंग कमेटी की भूमिका को लेकर फैली भ्रांतियों पर विराम लगा है
UGC पर नियमों की समीक्षा और संतुलन बनाने का दबाव बढ़ा है
अब देखना होगा कि UGC और शिक्षा मंत्रालय इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाते हैं।
