नई दिल्ली/अमेठी।
UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा लाए गए नए **Equity Regulations** को लेकर देशभर में विरोध और असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में अमेठी से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री **संजय सिंह** ने सोशल मीडिया के माध्यम से इन नियमों पर सवाल खड़े किए हैं।
संजय सिंह ने अपने पोस्ट में स्पष्ट शब्दों में कहा कि
> **“न्याय तभी सार्थक है, जब वह सभी के लिए समान और निष्पक्ष हो।”**
उन्होंने आरोप लगाया कि UGC की नई इक्विटी रेगुलेशंस में **संतुलन का अभाव** है, जिससे देश के शिक्षा संस्थानों में **चिंता और आशंका का माहौल** बन रहा है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कई अहम सवाल उठाते हुए कहा—
* भेदभाव की परिभाषा **सीमित क्यों रखी गई है**?
* झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर **दंड का स्पष्ट प्रावधान क्यों नहीं है**?
* क्या बिना संतुलित प्रतिनिधित्व वाली समितियाँ वास्तव में न्याय कर सकती हैं, या फिर यह केवल **औपचारिक निर्णय** बनकर रह जाएँगी?
संजय सिंह ने आगे कहा कि यदि नियमों में पारदर्शिता और निष्पक्षता नहीं होगी, तो निर्दोष लोगों के शोषण की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने UGC से अपील करते हुए कहा कि ये नियम **जाति-निरपेक्ष**, **पारदर्शी** और **सभी के लिए सुरक्षित बनाए जाएँ, ताकि शिक्षा संस्थानों में भय का वातावरण न बने।
अंत में उन्होंने **माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी** से आग्रह किया कि
“न्याय के पथ पर चलते हुए हर नागरिक के सम्मान और सुरक्षा की रक्षा सुनिश्चित की जाए।”
UGC के इन नए नियमों को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक जगत में बहस तेज होती जा रही है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएँ सामने आने की संभावना है।
