आगरा/बाह: उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘भदावर राजघराने’ का अपना एक अलग रसूख और इतिहास रहा है। लेकिन हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने बाह विधानसभा और पूरे जिले के राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। खबर है कि कार्यक्रम के दौरान बाह की वर्तमान विधायक रानी पक्षालिका सिंह को उचित स्थान (कुर्सी) नहीं मिली, जिसे उनके समर्थकों द्वारा सीधे तौर पर ‘रानी साहिबा का अपमान’ बताया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक मंच पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी थी। प्रोटोकॉल के अनुसार विधायक होने के नाते रानी पक्षालिका सिंह का स्थान मंच पर विशिष्ट होना चाहिए था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अव्यवस्था के चलते उन्हें वह सम्मान और स्थान नहीं मिला जिसकी वे हकदार थीं।
समर्थकों में भारी आक्रोश
जैसे ही यह खबर और इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, बाह क्षेत्र की जनता और रानी साहिबा के समर्थकों में नाराजगी फैल गई। समर्थकों का कहना है:
प्रोटोकॉल का उल्लंघन: एक महिला विधायक और राजघराने की प्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार प्रोटोकॉल की अनदेखी है।
क्षेत्रीय अस्मिता का सवाल: समर्थकों के अनुसार, यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे बाह क्षेत्र की जनता और उनकी विरासत का अपमान है।
प्रशासनिक लापरवाही: आरोप लगाया जा रहा है कि आयोजकों और स्थानीय प्रशासन ने जानबूझकर या लापरवाही वश इस ओर ध्यान नहीं दिया।
विपक्ष को मिला मुद्दा
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस घटना ने विपक्ष को भी बैठे-बिठाए एक मुद्दा दे दिया है। भदावर घराना हमेशा से जनता के बीच अपनी गरिमा के लिए जाना जाता है, ऐसे में इस ‘कुर्सी विवाद’ ने क्षेत्र की राजनीति में एक नया मोड़ ले लिया है।
“रानी साहिबा केवल एक विधायक नहीं हैं, वे क्षेत्र की परंपरा की प्रतीक हैं। उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ बाह की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।”
फिलहाल, इस मामले पर रानी पक्षालिका सिंह की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन उनके समर्थकों की मांग है कि इस चूक के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए।

